Posts

Showing posts from January, 2017

“ थिएटर ऑफ़ रेलेवंस ” “कलाकार की कलात्मक चुनौतियां और प्रतिबद्धता” कार्यशाला

Image
“ थिएटर ऑफ़ रेलेवंस ” “कलाकार की कलात्मक चुनौतियां और प्रतिबद्धता” कार्यशाला “21-25 जनवरी,2017” विश्वविख्यात रंग चिन्तक और “ थिएटर ऑफ़ रेलेवंस ” नाट्य सिद्धांत के जनक मंजुल भारद्वाज “21-25 जनवरी,2017”तक होने वाली पांच दिवसीय आवासीय कार्यशाला कलाकार की कलात्मक चुनौतियां और प्रतिबद्धताको युसूफ मेहर अली सेंटर,पनवेल (मुंबई) में उत्प्रेरित करेंगें. “ थिएटर ऑफ़ रेलेवंस ” नाट्य सिद्धांत की स्वयं और समूह के आत्म अनुभव आधारित कलात्मक प्रक्रिया में सहभागी क्लासिक नाटक  "अनहद नाद - Unheard sounds of Universe" से अपनी कलात्मक चुनौतियां से रूबरू होकर उनके निवारण के लिए प्रकृति के सानिद्ध्य में अपने आपको खंगोलेगें और अपने अन्दर कलात्मक व्यक्तित्व को खोजते हुए अपनी कलात्मक प्रतिबद्धता का संकल्प लेगें !


"

Theatre of Relevance - An Artistic Movement !

Image
"थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स" या तत्वज्ञानाचा आरंभ आणि सराव सुप्रसिद्ध रंगचिंतक, "मंजुल भारद्वाज" यांनी 12 ऑगस्ट 1992 रोजी संपूर्ण जगभरात सुरु केला. "थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स" तत्वानुसार, "प्रेक्षक" हा सर्वात सशक्त आणि पहिला रंगकर्मी आहे आणि त्यानंतर लेखक, दिगदर्शक आणि कलाकार. "TOR" ची प्रक्रिया स्थापित रंगभूमीच्या मनोरंजनाची चौकट मोडून, रंगभूमी हि जगण्याचा सक्षम मार्ग आहे हे तत्व आणि दृष्टिकोन प्रेक्षकांमधे रुजवते.
रंगभूमी हि सृजनात्मक बदल घडवून आणणारी प्रक्रिया आहे हे "TOR" ने आपल्या रचनात्मक आणि सकारात्मक प्रयोगांतून सिद्ध करून, संपूर्ण जगभरात क्रांतीचा ज्वालामुखी पेटवला आहे. "थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स" हे तत्व, "कलेसाठी कला" या भांडवलशाहीच्या संधीसाधु आणि पलायनवादी भूमिकेला नाकारून, प्रतिबद्ध आणि जबाबदार, सृजनात्मक उत्कृष्टतेला प्राधान्य देऊन, एका उत्तम आणि सुंदर अशा मानवी विश्वाची रचना करण्यासाठी प्रेरीत आणि प्रतिबद्ध करते.




“थिएटर ऑफ रेलेवेंस”नाट्य सिद्धांतका सूत्रपात ,अभ्यास और क्रियान्वयन  सुप्रसिद्ध रंगचिंतक, "मंजुल …

Performance of multilingual play by renowned Theatre thinker Manjul Bhardwaj "अनहद नाद - Unheard sounds of Universe"

Image
On 28 Janury,2017 (Saturday) 11 AM Shivaji Mandir, Dadar (West), Mumbai

Art is an exploration…. ever evolving process of fine tuning the nuances of creativity to facilitate the life to be alive to make mankind as humane… ever evolving artistic process purifies human to find their purpose of life, to encourage and strengthen their belief in “Humane & Humanity” … Artist is a creator &  commits entire creativity to art, to carves into an ever evolving & free flowing spirit of positivism…. dedicates this vision of ‘Emancipative Artistic Positivism” to the world and inspire the world to commit their energy to create a world which is  ‘better & Humane’….
Artist do not live to fill up their bellies but to make the life artistic, to connect the human life with nature, to create harmonious rhythm between mankind & nature… as the mankind disconnects itself from nature … it becomes self disruptive & suicidal ..Man destroys mankind … and today in the name of “development” ..…

रंग चिन्तक मंजुल भारद्वाज द्वारा लिखित और निर्देशित बहुभाषिक नाटक "अनहद नाद - Unheard sounds of Universe" का मंचन”

Image
शिवाजी मंदिर नाट्य मंदिर, 28 जनवरी ,2017 (शनिवार) को सुबह 11 बजे
कला एक खोज है ... निरंतर खोज ..जो कहीं रूकती नहीं है ..बस जीवन को लगातार जीवन और मनुष्यों को मनुष्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध होती है उनको लगातार शुद्दिकरण की प्रक्रिया के अनुभव लोक की अनुभति से जीवन और मनुष्य के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए... इंसान और इंसानियत का बोध और निर्माण करते हुए... कलाकार साधक हैं  ..जो अपनी कला साधना से तपाता है अपने आप को और एक खोजी रूह की अनंत खोज में स्वयं समर्पित कर विश्व को अपनी कला से रचनात्मकदृष्टिदेकर प्रेरित करतें हैं ... 
कलाकार मात्र अपना पेट भरने के लिए कलाकार नहीं होता अपितु मानव के जीवन को कलात्मक और प्रकृति की लय और ताल से जोड़ते हैं ..क्योंकि ये प्राकृतिक लय और ताल जब टूटते हैं तो मनुष्य विध्वंसक होकर अपने आप को नष्ट करता है ... आज मनुष्य अपने इसी विध्वंसक रूप के चरम पर बैठा है और अपनी चालाकी से उसे विकास कह रहा है ...जबकि चारों और हिंसा और हाहाकार है .. 
कला और कलाकारों को बाज़ार ने अपने चुंगल में जकड़ कर कठपुतली बना लिया है ..और उन्हें मात्र एक बिकाऊ वस्तु के रूप में जनमानस में परोस रह…