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Showing posts from November, 2016

रंग चिन्तक मंजुल भारद्वाज के बहुचर्चित नाटक "गर्भ" का मंचन 29 नवम्बर ,2016 शांतिवन , पनवेल !

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गर्भ-जीवन चिंतन को संवारता एक नाटक ·धनंजय कुमार रंगकर्मी मंजुल भारद्वाज ने इसी गूढ़ प्रश्न के उत्तर को तलाशने की कोशिश की है अपने नवलिखित व निर्देशित नाटक “गर्भ“ में. नाटक की शुरुआत प्रकृति की सुंदर रचनाओं के वर्णन से होती है, मगर जैसे ही नाटक मनुष्यलोक में पहुँचता है, कुंठाओं, तनावों और दुखों से भर जाता है. मनुष्य हर बार सुख-सुकून पाने के उपक्रम रचता है और फिर अपने ही रचे जाल में उलझ जाता है, मकड़ी की भांति. मंजुल ने शब्दों और विचारों का बहुत ही बढ़िया संसार रचा है “गर्भ” के रूप में. नाटक होकर भी यह हमारे अनुभवों और विभिन्न मनोभावों को सजीव कर देता है. हमारी आकांक्षाओं और कुंठाओं को हमारे सामने उपस्थित कर देता है. और एक उम्मीद भरा रास्ता दिखाता है साँस्कृतिक चेतना और साँस्कृतिक क्रांति रूप में. मुख्य अभिनेत्री अश्विनी का उत्कृष्ट अभिनय नाटक को ऊँचाई प्रदान करता है, यह समझना मुश्किल हो जाता है कि अभिनेत्री नाटक के चरित्र को मंच पर प्रस्तुत कर रही है या अपनी ही मनोदशा, अपने ही अनुभव दर्शकों के साथ बाँट रही है. प्रख्यात रँगकर्मी मंजुल भारद्वाज कानाटक “गर्भ” प्रतीक है खूबसूरत दुनिया का·संतोष …

प्रबंधन और थिएटर ऑफ़ रेलेवंस - मंजुल भारद्वाज

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प्रबंधन और थिएटर ऑफ़ रेलेवंस
- मंजुल भारद्वाज थिएटर का प्रबंधन यानि मैनेजमेंट से क्या रिश्ता है ? थिएटर की हमारी जिंदगी में क्या अहमियत है ?
बस मात्र मनोरंजन और उससे आगे कुछ नहीं । एक समाज के रूप में हम सब बड़े हँसते हुए यह कहते हैं कि पूरा संसार एक मंच हैं और हम सब इसके अभिनेता हैं । पर यह बात बस कहने भर की है । इसे कौन याद रखता है ? और इस तरह से हम जिंदगी की आकर्षक चुनौतियों और खोजी यात्राओं - अंतः और बाह्य को करने , तलाशने से वंचित रह जाते हैं ।
थिएटर का मतलब है समय और जगह (Time and Space) का प्रबंधन ।
मानव संसाधनों , भावनाओं , विचारों , सपनों , इच्छाओं , क्रियाओं , प्रतिक्रियाओं तथा कारोबारी , सामाजिक और संगठनात्मक व्यवहार के मैनेजमेंट के लिए थिएटर हमेशा एक जिवंत अनुभव है । एक विरेचन (कैथारसिस) प्रक्रिया है । क्या आपने कभी सोचा है कि आप मेनेजर , लीडर या कारोबारी उद्मयी कुछ भी हो थिएटर आपको सशक्त बना सकता है । थिएटर का अनुभव जीवन भर साथ रहता है । आज का विश्व वैल्यू बेस्ड लीडरशिप को मानता है । और थिएटर इस अपेक्षा को पूरा करने की राह दिखता है । आप भी जानते होंगे कि हमारे राष्ट्रपिता महात्…

“थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” नाट्य सिद्धांत पर आधारित लिखे और खेले गए नाटकों के बारे में- भाग - 7.. आज नाटक “बी -7”

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नाटक “बी -7‘भूमंडलीकरण’, निजीकरण और बाजारवाद पर प्रहार है . सात पक्षियों के समूह ने अपने आप को पृथ्वी का श्रेष्ठ प्राणी समझने वाले मनुष्य की सोच पर तीखा व्यंग करते हुए ‘पृथ्वी’ को उसके प्रकोप से बचाने की बात कही है . पक्षी मनुष्य की ‘विकास’ संकल्पना को सिरे से खारिज़ करते हुए उसे मनुष्य की विनाश लीला बताते है ... “मनुष्य विकास के नाम पर अपनी कब्र खुद खोद रहा है” .. जंगल में रहने वाला ‘आदिवासी’ पक्षियों को महानगरों में रहने वाले ‘बुद्धिजीविओं’ से ज्यादा प्रगतिशील और ‘बुद्धिमान’ लगता है . ‘आदिवासी’ की दृष्टि सर्वसमावेशी और प्रगतिशील है जबकि दुनिया के तथाकथित महानगरीय ‘बुद्धिजीवी’ ढपोर शंख हैं  ! जर्मनी , यूरोप और भारत में अंग्रेजी , जर्मन और हिंदी में प्रयोग ! B –7:
The play B-7 depicts the story of 7 birds that are facing a threat for their survival. The birds decide to form a fact-finding committee to list out the threats to their survival. This way they enter in the human world and expose the reality of today’s world. How the children are being deprived from their childhood and how th…