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“थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” नाट्य सिद्धांत पर आधारित लिखे और खेले गए नाटकों के बारे में- भाग - 6.. आज नाटककार धनंजय कुमार लिखित नाटक “विद्या ददाति विनयम”

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नाटककार धनंजय कुमार लिखित नाटक “विद्या ददाति विनयम– शिक्षा के / विद्या के अर्थ और उसके मर्म को उजागर करते हैं . आज बाजारवाद / पूंजीवाद और भारत में लार्ड मैकाले की औपनिवेशिक शिक्षा नीति से शिक्षा व्यवस्था और तंत्र शिक्षा को पेट भरने तक सिमटाये हुए हैं और जितना शिक्षा का प्रचार प्रसार हो रहा है उतना या उससे ज्यादा भ्रष्टाचार , हिंसा और हैवानियत बढ़ रही है . इसका सीधा अर्थ है की शिक्षा अपने मूल उद्देश्य से भटक गयी है , वो व्यापार तो बन गयी पर ‘विद्या’ नहीं बन पायी ! नाटक “विद्या ददाति विनयमशिक्षा केमौलिक  उद्देश्य को हाशिये पर रह रहे, शिक्षा से वंचित  बच्चों के माध्यम से रेखांकित करते हैं की शिक्षा ‘मनुष्य को इंसान’ बनाती है ! 1998 में यानी 18 साल पहले पत्रकार , समीक्षक , सीरियल और फिल्म लेखक  और निर्देशक “थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ के संपर्क में आए और सकारात्मक रूप से प्रभावित हुए . मूलतः धनंजय कुमार उग्र पर सहिष्णु समीक्षक हैं .. पटना के हर तरह के रंगकर्म से वाकिफ , पत्रकारिता में लेफ्ट के अखबार  से लेकर राईट तक वाया जनसत्ता , शांति जैसे सीरियल का लेखन कर चुकने के बाद , इंडस्ट्री , पत्रकारिता …