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“थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” नाट्य सिद्धांत पर आधारित लिखे और खेले गए नाटकों के बारे में- भाग - 2.. आज का नाटक है “मेरा बचपन”

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नाटक – “मेरा बचपन” – बाल मजदूरी पर एक प्रहार है और किसी भी सूरत में बचों के शोषण को स्वीकार नहीं करता. मध्यम वर्ग और सरकारों के गरीबी विलाप के खिलाफ़ ये नाटक इस भ्रम को तोड़ता है की गरीबी बाल मजदूरी का एकमात्र और इकलौता कारण है.नाटक अपने तर्क और शोध से सिद्ध करता है की गरीबी के नाम पर बच्चों का शोषण करने की मानसिकता बाल मजदूरी का कारण है.

“थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” नाट्य सिद्धांत पर आधारित लिखे और खेले गए नाटकों के बारे में आज से एक श्रंखला शुरू कर रहे हैं .. आज का नाटक है “दूर से किसी ने आवाज़ दी”

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नाटक – दूर से किसी ने आवाज़ दी – बाबरी (मस्जिद) ढांचा ढहाने के बाद मुंबई में भड़के साम्प्रदायिक दंगों के पीछे साज़िश को बेनकाब करते हुए आम जनता से साम्प्रदायिक व राष्ट्रीय एकता की अपील इस नाटक की आत्मा है . ये नाटक भारतीय संविधान के सबसे पवित्र और भारत के अस्तित्व के  लिए आधारभूत सिद्धांत ‘सेकुलरवाद’ का पैरोकार है ! DOOR SE KISINE AWAAZ DI: Written after the Bombay riots of 1992-1993, this play is a plea for communal, as well as a scathing indictment of a system where opportunists manipulate religious sentiments for political ends. Eventually it is common man who becomes helpless pawn in the unscrupulous machinations of power of politics. This play has been performed successfully more than 1000 times on stage as well as on street.
प्रथम मंचन 26 जनवरी 1993 “थिएटर ऑफ़ रेलेवंस “नाट्य सिद्धांतकी अग्निपरीक्षा का समय भी एक वर्ष के भीतर ही आ गया। ‘ मुम्बई/ देश साम्प्रदायिक दंगों की आग में झुलस गया’ - युवा नाट्य कर्मियों ने बड़ी लगन और मेहनत से मुम्बई के चप्पे - चप्पे पर जाकर नाटक खेला ‘दूर से किसी …