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Showing posts from March, 2012

Photos of the Play Napunsak

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The play is written, performed and directed by Manjul Bhardwaj. The play was premiered on March 9,1998 at Sydenham College, Mumbai for "Theatre in Home"an Initiative by Rakesh Shreemal



Theatre as a career workshop

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Theatre as a career workshop module was conceived by Manjul Bhardwaj, Rakesh shreemal, Amin Purushottam and Babli Rawat...the workshop was conducted by Manjul Bhardwaj along with the renowned theatre personality like Ramesh Rajhans, Rajkumar Kamle, Waman Kendre etc. These photos are of 2000 batch...photos by Rajkumar Kamble and Ramesh Rajhans














A Book on Indian Theatre Personality - Manjul Bhardwaj "एक रंग आन्दोलन- एक रंग चिंतन - " मंजुल भारद्वाज- थिएटर ऑफ रेलेवेन्स "

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एक रंग आन्दोलन-  एक रंग चिंतन -  " मंजुल भारद्वाज- थिएटर ऑफ रेलेवेन्स ".आज से लगभग २० साल पहले हिंदी के अन्य  नाट्यकर्मियों की भाँति मंजुल भारद्वाज की भी यही धारणा थी कि हिंदी में ना मौलिक नाटक हैं और न सहृदय दर्शक. पर 1992  में नाट्यकर्म की एक असफलता उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ लेकर आई, सड़क किनारे सामान बेचने वाले एक आम दुकानदार की जिज्ञासा ने उनके सोच को एक मोड़ दिया. ' मेरे नाटकों से इस आम इंसान का कोई सम्बन्ध क्यों नहीं है? मेरे नाटकों में इस आम आदमी की सहभागिता क्यों नहीं है?' और तब उन्हें महसूस हुआ कि जब तक नाटक इन आम लोगों को अपने से नहीं जोड़ेगा तब तक नाटक विशेषकर हिंदी नाटक इसी तरह से दर्शकों के लिए तरसता रहेगा. और इसी बिंदु से शुरुआत  हुई एक ऐसी नाट्य पद्धति, एक ऐसी नाट्य सोच की , एक ऐसे नाट्य दर्शन की जिसमे नाटक के लिए पहला रंगकर्मी दर्शक को माना गया. इस नाट्य पद्धति को नाम मिला " थिएटर ऑफ रेलेवेन्स".  इस पद्धति की सोच का आधार यही है कि नाटक का मूल उद्देश्य है लोगों से, लोगों द्वारा और लोगों के लिए. नाटक की सार्थकता तभी है जब उसमे आम…