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थिएटर ऑफ़ रेलेवंस" नाट्य दर्शन के 25 वर्ष :दिल्ली में 3 दिवसीय नाट्य उत्सव

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'थिएटर ऑफ़ रेलेवंस' नाट्य सिद्धांत की रंग यात्रा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 10,11 और 12 अगस्त 2017 को दिल्ली में तीन दिवसीय नाट्य उत्सव और रंगविमर्श का आयोजन किया जा रहा है। 


सत्ता हमेशा कलाकार से डरती है
मुझे याद है वो दिन जब अपने रंगकर्मियों को सफ़ेद कुर्ता देते हुए कहा था ‘ये है अपना कफ़न’! सभी कलाकारों ने दंगों की नफरत व घावों को अपनी कला से प्यार और मानवीय ऊष्मा से भर दिया.... मंजुल भारद्वाज, रंगकर्मी नब्बे का दशक देश, दुनिया और मानवता के लिए आमूल बदलाव का दौर रहा। 'औद्योगिक क्रांति' के पहिये पर सवार होकर मानवता ने सामन्तवाद की दासता से निकलने का ख्वाब देखा, पर नब्बे के दशक तक आते आते साम्यवाद के किले ढह गए और 'औद्योगिक क्रांति' सर्वहारा की मुक्ति का मसीहा होने की बजाए पूंजीवाद का खतरनाक, घोर शोषणवादी और अमानवीय उपक्रम निकला, जिसने सामंती सोच को न केवल मजबूती दी बल्कि विज्ञान के आविष्कार को तकनीक देकर भूमंडलीकरण के जरिये दुनिया को एक शोषित ‘गाँव’ में बदल दिया. ऐसे समय में भारत भी इन वैश्विक प्रक्रियाओं से अछूता नहीं था. एकध्रुवीय वैश्विक घटनाओं ने भ…

Theatre Thinker Manjul Bhardwaj facilitates youth to explore their political Identity in "#TheatreofRelevance -#राजनैतिकआत्मबोध " #स्वराजशाला

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Facilitated 4 day "#TheatreofRelevance -#राजनैतिकआत्मबोध " #स्वराजशालाorganised by #Youth4Swaraj at #Smabhavana Institute in Palampur , Himachal Pradesh from 25-28 June ,2017 in which Youth from Delhi, Haryana, Himachal & Punjab explored their political self .... Lovey Vikram share her Journey of 'Swaraj Shala".. Must read story ....


Ye Swarajshala kiski hai?…….Hamari _______my experiences of Swarajshala, Palampur Swarajshala, an initiative by Youth 4 Swaraj(Y4S), gave me an avenue of working in a very different kind of group and of understanding a different group dynamics. Group or collective has been an area of interest for me owing to my research work. However, bringing theory to practice was very different. Swarajshala was a unique group as compared to the various groups that I had worked with or worked in. I have witnessed my apprehension and indifference towards political and social issues transform into a sense of belongingness and affirmation. Instead of be…

#Playwright and #theatre #actor #ManjulBhardwaj at his residence in Kandivali Mumbai ... PIC source #Hindustan Times ...

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भारत के प्रयोगशील रंगकर्मी मंजुल भारद्वाज ने अपने नए नाटक 'राजगति" से जगाई युवा में राजनीति की नई चेतना

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रंगचिन्तक मंजुल भारद्वाजलिखित एवम् निर्देशितनाटक "राजगति" ने बदली मेरी राजनैतिक अवधारणा - केशव

"हमेशा से ही सुनता आया था कि राजनीति बहुत गन्दी है, एक गटर की तरह है। आस पास के माहौल को हमेशा राजनीति के ख़िलाफ़ ही पाया था। 2011 में अन्ना आंदोलन और फिर आप के गठन के दौरान लगने लगा था कि इसे साफ़ किया जा सकता है, पर फिर कुछ समय के बाद ये लगने लगा कि ये सच में बहुत गन्दी है और अच्छे से अच्छे व्यक्ति को भी बिगाड़ देती है। राजनीति का इतिहास ऐसे लोगों से भरा पड़ा है जो राजनीति में ईमानदारी पूर्वक संघर्ष करके आए मगर बाद में पथभ्रष्ट हो गए। जिससे यही लगने लगा की राजनीति में ही कोई बुराई है जो लोगों को भ्रष्ट कर देती है। 
जब मैंनेरंगचिन्तक मंजुल भारद्वाजलिखित एवम् निर्देशितऔर अश्विनी नांदेडकर , कोमल खामकर और तुषार म्हस्के अभिनीत नाटक "राजगति" को देखा, उस पर विचार किया तो ये समझ में आया कि राजनीति बुरी नहीं है, वो तो सत्ता और व्यवस्था के गठजोड़ से उत्पन्न बुराइयां हैं जिन्हें राजनीति के सर पर डाल दिया जाता है। हमारे राजनेता सत्ता प्राप्त करने के बाद इस व्यवस्था की मदद से राजनीति को …

रंगचिन्तक मंजुल भारद्वाज आदिवासी ‘युवाओं और बच्चों’ के लिए 4 दिवसीय ‘थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ कार्यशाला को उत्प्रेरित करेगें !

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#थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ “हमारा जीवन सुन्दर है !’ 4 दिवसीय #आदिवासी ‘युवाओं और बच्चों’ के लिए नाट्य कार्यशाला 7 -10 मई 2017, चिखलवाड़ी, त्र्यम्बकेश्वर , नासिक उत्प्रेरक : रंगचिन्तक मंजुल भारद्वाज ‘बेचने और खरीदने’ के मन्त्र से चलने वाले इस ‘मुनाफ़ाखोर’ #भूमण्डलीकरण के दौर में मानव ने अपने ‘लालच’ की भूख  को  मिटाने के लिए ‘अंधाधुंध’ #विकास के भ्रमजाल से अपने लिए सबसे बड़ा ‘पर्यावरण’ संकट खड़ा किया है . पृथ्वी ‘मानव’ की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधनों से लैस है, पर उसकी ‘लालच’ को पूरा करने के लिए उसके संसाधन ‘सीमित’ हैं . आज के आधुनिक कहलाने वाले पढे लिखे ‘अनपढ़’ समाज की  जीवन शैली की दिशा  ‘बाजारवाद’ तय करता है . ‘बाजारवाद’ की ‘लूट’ को #विज्ञापन एक ‘लुभावन’ सपने के रूप में समाज को परोसता है . विज्ञापन के ‘मुनाफ़ाखोर’ जुमले ‘YOU do not need it, but you want to have it’ समाज का ‘कुतर्क’ मानस तैयार कर रहे हैं जो ‘ज़रूरत’ की निरर्थकता और ‘लालच’ की सार्थकता स्थापित कर रहा है और ऐसे विज्ञापन के ‘जुमले’ लिखने वाले मीडिया में ‘#पर्यावरण’ बचाने की गुहार लगाते हैं . मीडिया में वो ’फ़िल्मी एक्टर ’ बि…

थिएटर ऑफ़ रेलेवंस “राजनीति’ ‘खेती, किसान,आत्महत्या और डिजिटल इंडिया’नाट्य पूर्वाभ्यास कार्यशाला -रंग चिन्तक मंजुल भारद्वाज

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थिएटर ऑफ़ रेलेवंस “राजनीति’ ‘खेती, किसान,आत्महत्या और डिजिटल इंडिया’
‘अपनी ही ‘खोपड़ी’ लिए खड़ा भारतीय ‘किसान’ और महान भारत का ‘जनमानस’ खामोश क्यों?’ विषय पर नाट्य पूर्वाभ्यास कार्यशाला – पड़ाव -3 उत्प्रेरक – रंग चिन्तक मंजुल भारद्वाज कब : 23 - 27 अप्रैल,2017 कहाँ : युसूफ मेहरअली सेंटर , पनवेल ( मुंबई) सहभागी : वो सभी देशवासी जो स्वयं को लोकतंत्र का पैरोकार और रखवाले समझते और मानते हैं विवरण हमारा जीवन हर पल ‘राजनीति’ से प्रभावित और संचालित होता है पर एक ‘सभ्य’ नागरिक होने के नाते हम केवल अपने ‘मत का दान’ कर अपनी राजनैतिक भूमिका से मुक्त हो जाते हैं और हर पल ‘राजनीति’ को कोसते हैं ...और अपना ‘मानस’ बना बैठे हैं की राजनीति ‘गंदी’ है ..कीचड़ है ...हम सभ्य हैं ‘राजनीति हमारा कार्य नहीं है ... जब जनता ईमानदार हो तो उस देश की लोकतान्त्रिक ‘राजनैतिक’ व्यवस्था कैसे भ्रष्ट हो सकती है ? .... आओ अब ज़रा सोचें की क्या बिना ‘राजनैतिक’ प्रकिया के विश्व का सबसे बड़ा ‘लोकतंत्र’ चल सकता है ... नहीं चल सकता ... और जब ‘सभ्य’ नागरिक उसे नहीं चलायेंगें तो ... बूरे लोग सत्ता पर काबिज़ हो जायेगें ...और वही हो रहा है ... आओ …